चमोली: कम बर्फबारी के बीच औली में राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप जारी

चमोली जिले के औली में राष्ट्रीय स्कीइंग चैंपियनशिप का आयोजन जारी है, लेकिन इस बार कम बर्फबारी ने प्रतियोगिता की तस्वीर बदल दी है। समुद्र तल से लगभग 2,500 से 3,050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित औली में आमतौर पर दिसंबर के अंत से फरवरी तक घनी बर्फ जमी रहती है, लेकिन इस मौसम में ढलानों पर बर्फ जगह-जगह ही दिखाई दे रही है।
जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुई हल्की बर्फबारी से ढलानों को कुछ समय के लिए राहत जरूर मिली थी, लेकिन बर्फबारी की निरंतरता नहीं बन पाई। दिन में तेज धूप के कारण सीमित बर्फ तो बची हुई है, लेकिन आमतौर पर तीन से चार फीट रहने वाली बर्फ की मोटाई घटकर करीब डेढ़ से दो फीट रह गई है, वह भी अधिकतर ऊंचाई वाले हिस्सों में।
चैंपियनशिप के लिए चुनी गई ढलान पर इस समय करीब 400 मीटर तक ही बर्फ की परत है। कई स्थानों पर बर्फ के बीच घास दिखाई दे रही है, जिससे खिलाड़ियों और आयोजकों दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतियोगिता तय कार्यक्रम के अनुसार चल रही है, लेकिन पतली बर्फ को लेकर प्रतिभागियों और स्थानीय लोगों में चिंता देखी जा रही है।
कम बर्फबारी को कुछ लोग बदलते मौसम पैटर्न से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ इसे बढ़ते वैश्विक तापमान का असर मान रहे हैं। इसके बावजूद औली में पर्यटकों और शीतकालीन खेल प्रेमियों की आवाजाही बनी हुई है। चैंपियनशिप के साथ-साथ लोग यहां से दिखाई देने वाली हिमालय की चोटियों का आनंद ले रहे हैं।
औली से नंदा देवी शिखर का दृश्य साफ नजर आता है, जो इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाता है। जोशीमठ से औली तक की रोपवे सेवा भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। औली में स्थित उच्च ऊंचाई वाली कृत्रिम झील कम बर्फबारी के समय स्नो मेकिंग गतिविधियों में सहायक मानी जाती है।
इसे भी पढ़ें – रुड़की में मुर्गी दाना चोरी का खुलासा, एक आरोपी गिरफ्तार
यह चैंपियनशिप एक बार फिर औली की अंतरराष्ट्रीय पहचान के साथ-साथ बदलती सर्दियों की चुनौतियों को सामने ला रही है। मौसम के रुख पर अब आयोजकों और स्थानीय हितधारकों की नजर बनी हुई है।




