आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय स्टाइपेंड विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय को नोटिस

आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय स्टाइपेंड विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय को नोटिस

उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय, हरिद्वार में स्नातकोत्तर छात्रों को स्टाइपेंड दिए जाने में कथित भेदभाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने गुरुकुल परिसर से जुड़े इस मामले में विश्वविद्यालय से 17 मार्च तक जवाब मांगा है। यह नोटिस प्रभावित छात्रों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया गया।

याचिका अल्मोड़ा निवासी ललित तिवारी सहित गुरुकुल परिसर में अध्ययनरत विभिन्न बैचों के स्नातकोत्तर छात्रों ने दायर की है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय में कुछ पीजी छात्रों को नियमों के अनुसार मासिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जबकि समान शैक्षणिक और क्लीनिकल कार्य करने वाले अन्य छात्रों को बिना किसी स्पष्ट कारण के इससे वंचित रखा गया है।

याचिका में कहा गया है कि इस तरह का वर्गीकरण न तो तार्किक है और न ही कानूनन उचित। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय ने पीजी सीटों को स्टाइपेंड और नॉन-स्टाइपेंड श्रेणियों में बांट दिया है, जो वर्ष 2024 में अधिसूचित भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग के आयुर्वेद स्नातकोत्तर शिक्षा मानकों का उल्लंघन है।

छात्रों के अनुसार स्टाइपेंड से जुड़ी सीटों पर पढ़ने वाले पीजी छात्रों को 55,400 रुपये से 62,100 रुपये तक मासिक भुगतान किया जा रहा है। इसके विपरीत याचिकाकर्ताओं को कोई स्टाइपेंड नहीं मिल रहा, जबकि सभी छात्रों पर समान ड्यूटी घंटे, जिम्मेदारियां और कार्यभार निर्धारित है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि यह भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, जो कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। छात्रों का दावा है कि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

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याचिकाकर्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि मौजूदा नियमों के अनुसार आयुर्वेद के स्नातकोत्तर छात्रों को अन्य चिकित्सा पद्धतियों के छात्रों की तरह बिना किसी भेदभाव के स्टाइपेंड मिलना चाहिए। मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर आगे की सुनवाई के लिए तिथि तय की है।

Saurabh Negi

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