चारधाम यात्रा 2025: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे, मगर जमीनी चुनौतियां भी बरकरार

चारधाम यात्रा 2025: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के दावे, मगर जमीनी चुनौतियां भी बरकरार

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में चारधाम यात्रा 2025 को सुरक्षित और स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से बेहतर बनाने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने इस बार केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में नए अस्पतालों की स्थापना, 154 एम्बुलेंस की तैनाती और हेलीकॉप्टर व बोट एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध कराने जैसे कई बड़े कदम उठाने की घोषणा की है।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार, यात्रा मार्ग पर 25 विशेषज्ञ डॉक्टर, 20 मेडिकल रिलीफ पोस्ट और 31 स्वास्थ्य जांच केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ट्रांजिट जिलों में 37 स्थायी स्वास्थ्य केंद्रों को भी सुदृढ़ किया गया है। ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने और हाई-रिस्क यात्रियों की पहचान के लिए भी सरकार प्रतिबद्ध है। इस साल स्वास्थ्य मित्रों (फर्स्ट मेडिकल रिस्पॉन्डर) की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सके।

हालांकि, इन प्रयासों के बीच कुछ सवाल भी हैं। चारधाम जैसे दुर्गम इलाकों में हर साल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चुनौतियां सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष भी 34,000 से अधिक मेडिकल आपातकालीन मामले सामने आए थे, जिसमें 1,011 मरीजों को एम्बुलेंस द्वारा और 90 मरीजों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया था और कई में समय पर मदद नहीं मिल पाई। नए अस्पताल और सेवाएं सकारात्मक कदम हैं, लेकिन खराब मौसम, संचार नेटवर्क की कमी और दुर्गम भूगोल जैसी चुनौतियों के बीच इनका प्रभावी कार्यान्वयन ही असली परीक्षा होगी।

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ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल की बात करें तो चारधाम क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या पहले से ही यात्रियों के अनुभवों में सामने आती रही है। ऐसे में तकनीकी समाधानों को जमीनी हकीकत से जोड़ना भी सरकार के सामने एक बड़ा लक्ष्य होगा। इसके बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों को प्रोत्साहन राशि, स्वास्थ्य मित्रों की संख्या में वृद्धि और आपातकालीन कॉल सेंटर को सशक्त करने जैसे प्रयासों से यह संकेत दिया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

यदि यह तैयारियां धरातल पर सटीक रूप से लागू की जाती हैं तो यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए पहले से अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हो सकती है, हालांकि व्यवस्थाओं की वास्तविक तस्वीर यात्रा शुरू होने के बाद ही सामने आएगी।

Saurabh Negi

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