उत्तरकाशी के धराली आपदा प्रभावित ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना, मुआवजे की मांग तेज

उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में आपदा प्रभावित ग्रामीणों ने गणतंत्र दिवस के दिन अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। काली कमली क्षेत्र में एकत्र होकर ग्रामीणों ने मुआवजा, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
धराली गांव में पांच अगस्त 2025 को बादल फटने और अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही हुई थी। इस आपदा में जानमाल का नुकसान हुआ था और बड़ी संख्या में मकान, होटल व अन्य ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए थे। ग्रामीणों के अनुसार आज भी कई परिवार सरकारी सहायता और पुनर्वास नीति के लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को सामने रखा है। इसमें आकलित नुकसान के अनुसार पूरा मुआवजा, स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था, क्षतिग्रस्त भवनों का पुनर्निर्माण और विस्थापित होटल संचालकों को वैकल्पिक भूमि देने की मांग शामिल है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त वाहनों और संपत्ति का मुआवजा देने पर भी जोर दिया गया है।
आंदोलनकारी ग्रामीणों ने कहा कि छोटे किसानों और बागवानों को आर्थिक सहायता दी जाए और कृषि ऋण माफ किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से संतोष नहीं होगा।
धरने की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अपर जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया कि मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और जल्द समाधान का प्रयास होगा।
ग्रामीणों ने बताया कि जिलाधिकारी के भी शीघ्र धरना स्थल पर पहुंचने की संभावना है। धराली का यह आंदोलन पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा के बाद पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया में आ रही चुनौतियों को उजागर कर रहा है।




