हाउस ऑफ हिमालयाज को बढ़ावा: कृषि निर्यात के लिए जिलों से सक्रिय भागीदारी के निर्देश

ग्रामीण विकास सचिव ने ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के तहत कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सभी जिलों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया है। प्रवासन रोकथाम, सीमांत क्षेत्र विकास और वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को पिछले वर्ष के लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने और इकाई लागत को विभागीय मानकों के अनुसार रखने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सभी प्रशिक्षण योजनाएं एनएसक्यूएफ मानकों के अनुरूप हों और कौशल विकास मंत्रालय द्वारा तय लागत मानकों का पालन करें। जहां आवश्यक हो, वहां मुख्यमंत्री उद्यमिता योजना के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए गए, ताकि रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
जिला प्रशासन को रोजगार विभाग से बेरोजगार युवाओं का डेटा एकत्र कर स्किल गैप विश्लेषण करने के निर्देश भी दिए गए। प्रशिक्षण को स्थानीय जरूरतों और युवाओं की रुचि के अनुसार ढालने पर जोर दिया गया। इसमें पर्यटन और आतिथ्य, खुदरा सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, कृषि, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
कृषि निर्यात को लेकर सचिव ने कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के तहत उत्पादों के लिए एनपीओपी या एनओपी प्रमाणन अनिवार्य होगा। केवल पीजीएस प्रमाणन निर्यात के लिए पर्याप्त नहीं है। जिलों को ब्लॉक या क्लस्टर स्तर पर प्रमाणन और प्रसंस्करण के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू करने और चयनित गांवों या क्लस्टरों की सूची विभाग को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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साथ ही, जिला प्रशासन को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने को कहा गया है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर देरी होने से निर्यात विस्तार की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।


