केदारनाथ में शून्य से नीचे तापमान के बीच जारी पुनर्निर्माण कार्य, अभी तक नहीं जमी बर्फ

रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ धाम में इस बार जनवरी के पहले सप्ताह में भी भारी बर्फबारी नहीं हुई है। शून्य से 10 डिग्री नीचे तापमान के बावजूद केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य लगातार जारी है। यह स्थिति करीब सात वर्षों बाद देखने को मिली है।
आमतौर पर जनवरी तक केदारनाथ धाम क्षेत्र में आठ से दस फीट तक बर्फ जम जाती है। ऐसे में सभी निर्माण कार्य बंद कर दिए जाते हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि में यहां साढ़े तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो चुकी थी। इस सर्दी में तीन बार हल्की बर्फबारी जरूर हुई, लेकिन बर्फ टिक नहीं पाई।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने और मौसम चक्र में बदलाव के कारण बर्फ नहीं जम पाई है। इसी वजह से इस समय धाम में करीब 50 से अधिक मजदूर कार्यरत हैं। अत्यधिक ठंड के कारण काम केवल दोपहर के समय चार से पांच घंटे ही किया जा रहा है। इसमें मुख्य रूप से वेल्डिंग और लकड़ी से जुड़े कार्य शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार केदारनाथ पुनर्निर्माण कार्य का दूसरा चरण लगभग 95 प्रतिशत पूरा हो चुका है। शेष कार्य 2026 की केदारनाथ यात्रा से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तीसरे चरण में 22 नए निर्माण प्रस्तावित हैं, जिनके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
इससे पहले वर्ष 2019 में भी ऐसी स्थिति देखी गई थी, जब जनवरी के पहले सप्ताह तक निर्माण कार्य चलता रहा था। सामान्य तौर पर मजदूर दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक धाम से लौट जाते हैं, लेकिन इस बार मौसम की वजह से कार्य आगे बढ़ सका है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी अभियंता रघुवीर सिंह ने बताया कि समय पर बर्फ न गिरने से काम संभव हो पाया है, हालांकि ठंड काफी तीव्र बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जनवरी में इस तरह की स्थिति असामान्य है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा है। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. महावीर सिंह नेगी के अनुसार बारिश और बर्फबारी में कमी वैश्विक ताप वृद्धि का संकेत है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी विक्षोभ में बदलाव, नमी की कमी, बढ़ता निर्माण और हिमालयी क्षेत्र में ब्लैक कार्बन की मात्रा भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।


