व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र सशक्त, देहरादून में बोले मोहन भागवत

देहरादून में आयोजित “संघ यात्रा–नए क्षितिज, नए आयाम” विषयक जन गोष्ठी के दूसरे दिन Mohan Bhagwat ने कहा कि समाज की सही संरचना ही राष्ट्र की मजबूती की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि जिस समाज की व्यवस्था सुदृढ़ होती है, उसे सुधारने में अधिक कठिनाई नहीं आती। समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र की सुरक्षा भी अभेद्य बनेगी।
उन्होंने कहा कि समाज की शक्ति ही व्यक्तियों और नेतृत्व को बल प्रदान करती है। यदि समाज कमजोर है तो नेतृत्व भी प्रभावी नहीं रह सकता। व्यक्ति निर्माण को उन्होंने राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त बताया और कहा कि संगठित एवं जागरूक समाज ही दीर्घकालिक परिवर्तन ला सकता है।
इतिहास का संदर्भ देते हुए उन्होंने 1857 के संघर्ष का उल्लेख किया और कहा कि उस समय राजनीतिक चेतना के अभाव के कारण पराजय का सामना करना पड़ा। जब तक समाज राजनीतिक रूप से जागरूक नहीं हुआ, तब तक अंग्रेजी शासन के विरुद्ध निर्णायक सफलता संभव नहीं थी।
उन्होंने कहा कि बाद में कांग्रेस का गठन हुआ, क्रांतिकारियों ने संघर्ष किया और सामूहिक प्रयासों से देश को स्वतंत्रता मिली। हालांकि स्वतंत्रता के बाद कई राजनीतिक दल अपने मूल मार्ग से भटक गए, जिससे समाज और राजनीति के संबंधों में बदलाव आया।




