नैनीताल की तीन अहम पहाड़ी सड़कें डेंजर ज़ोन घोषित, 100 करोड़ से स्थायी उपचार की तैयारी

नैनीताल जिले की तीन प्रमुख पहाड़ी सड़कों को लगातार भूस्खलन और धंसाव की समस्या के चलते डेंजर ज़ोन के रूप में चिन्हित किया गया है। इन सड़कों के दीर्घकालिक और स्थायी उपचार के लिए राज्य सरकार लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से कार्य कराने की योजना बना रही है। चिन्हित मार्गों में काठगोदाम–हैड़ाखान–सिमलिया बेंड राज्य मार्ग, रामनगर–बेतालघाट–रतोड़ा–बिनलेख मार्ग और बेतालघाट का शहीद बलवंत सिंह मार्ग शामिल हैं।
सबसे अधिक प्रभावित काठगोदाम–हैड़ाखान मार्ग का किलोमीटर तीन के पास स्थित लगभग 280 मीटर लंबा हिस्सा है, जो लगातार भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण उच्च जोखिम क्षेत्र बन चुका है। यह मार्ग भीमताल, ओखलकांडा और चम्पावत क्षेत्र को जोड़ता है, जिससे करीब 200 गांव सीधे प्रभावित होते हैं। मानसून के दौरान सड़क बंद होने से आवागमन के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाएं भी बाधित होती हैं।
अस्थायी व्यवस्थाओं से यातायात तो चल रहा है, लेकिन स्थायी समाधान न होने से आसपास की वन भूमि को भी नुकसान पहुंच रहा है। वैकल्पिक सड़क एलाइनमेंट का प्रस्ताव 2023–24 में स्वीकृत हुआ था, लेकिन 18 जनवरी 2024 को देहरादून स्थित पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय ने वन भूमि शामिल होने के कारण इसे खारिज कर दिया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने 36.01 करोड़ रुपये की संशोधित डीपीआर तैयार कर 27 जनवरी 2025 को एडीबी आपदा प्रबंधन ढांचे के तहत भेजी है।
रामनगर–बेतालघाट–रतोड़ा–बिनलेख मार्ग पर बावस क्षेत्र में 358 मीटर लंबा पुराना स्लिप ज़ोन बार-बार कटाव और यातायात बाधित होने का कारण बन रहा है। इस हिस्से के उपचार के लिए लोक निर्माण विभाग ने टीएचडीसी के साथ तकनीकी सहयोग का समझौता किया है। वहीं, शहीद बलवंत सिंह मार्ग मानसून में मलबा आने से अक्सर बंद रहता है, जिससे स्लाइड ज़ोन का उपचार अनिवार्य हो गया है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रत्नेश कुमार सक्सेना ने बताया कि तीनों सड़कों के प्रस्ताव आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं और कुल लागत करीब 100 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिलाधिकारी ललित मोहन रायल ने पुष्टि की कि प्रक्रिया तेज करने के लिए एक समिति गठित की गई है, जो स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद उपचार कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।




