बदरीनाथ–केदारनाथ क्यूआर कोड मामला: कोर्ट केस का हवाला देकर आरटीआई जानकारी नहीं रोकी जा सकती

बदरीनाथ–केदारनाथ क्यूआर कोड मामला: कोर्ट केस का हवाला देकर आरटीआई जानकारी नहीं रोकी जा सकती

उत्तराखंड राज्य सूचना आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी मामले के न्यायालय में लंबित होने मात्र से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। बदरीनाथ–केदारनाथ धाम से जुड़े क्यूआर कोड प्रकरण की सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि आरटीआई कानून के प्रावधानों में ऐसी कोई स्वतः रोक नहीं है।

आयोग ने बदरीनाथ कोतवाली के जनसूचना अधिकारी को चेतावनी भी जारी की। आयोग ने निर्देश दिए कि भविष्य में केवल कोर्ट में मामला होने का हवाला देकर सूचना रोकी न जाए, जब तक इसके लिए कोई ठोस कानूनी आधार या स्पष्ट न्यायिक आदेश मौजूद न हो।

सूचना आयुक्त कुशला नंद ने कहा कि यदि किसी मामले की जांच पूरी हो चुकी है, तो केवल न्यायालय में विचाराधीन होने के आधार पर सूचना देने से इनकार नहीं किया जा सकता। आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना तभी रोकी जा सकती है, जब इससे चल रही जांच, अभियोजन या न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो या अदालत द्वारा स्पष्ट रोक लगाई गई हो।

इसे भी पढ़ें – यूकेएसएसएससी भर्ती प्रक्रिया: दस्तावेज़ सत्यापन में अनुपस्थित 204 अभ्यर्थी अयोग्य

यह मामला वर्ष 2023 में बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में लगाए गए क्यूआर कोड से जुड़ा है। आयोग के इस फैसले के बाद बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने संतोष जताया और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

Saurabh Negi

Share