विधानसभा भर्ती मामले में जनहित याचिका निस्तारित, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान होने पर हाईकोर्ट का आदेश

विधानसभा भर्ती मामले में जनहित याचिका निस्तारित, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान होने पर हाईकोर्ट का आदेश


उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विधानसभा में कथित अनियमित भर्तियों से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में जांच पूरी हो चुकी है, आवश्यक कार्रवाई की जा चुकी है और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान भी कर ली गई है।

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस जनहित याचिका के निस्तारण से उन कर्मचारियों की याचिकाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिनकी सेवाएं समाप्त की गई हैं। वे याचिकाएं अलग से सुनवाई के लिए लंबित रहेंगी।

यह जनहित याचिका अभिनव थापर द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से विधानसभा में बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के कई नियुक्तियां की गईं, जो संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ थीं। याचिका में भर्ती से जुड़े मूल अभिलेख प्रस्तुत करने, न्यायिक सदस्य की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम गठित करने और अनियमित नियुक्तियों पर दिए गए वेतन व भत्तों की वसूली संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से करने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष प्रस्तुत शपथपत्र में बताया गया कि वर्ष 2001 से 2021 के बीच कुल 396 अस्थायी नियुक्तियां की गई थीं। इनमें से 166 कर्मचारियों को वर्ष 2015 में नियमित किया गया, जबकि 227 कर्मचारियों की सेवाएं 23 सितंबर 2022 को समाप्त कर दी गईं।

अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के आधार पर कहा कि संबंधित पक्षों द्वारा जांच की जा चुकी है, सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जनहित याचिका में अब किसी अतिरिक्त निर्देश की आवश्यकता नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि ये नियुक्तियां उस समय के विधानसभा अध्यक्षों के निर्देशों पर की गई थीं, जिन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्रियों की सहमति प्राप्त थी, जबकि विधानसभा सचिवालय की ओर से आपत्तियां दर्ज की गई थीं। बाद में गठित समिति की रिपोर्ट के आधार पर इन नियुक्तियों को निरस्त किया गया।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया और दोहराया कि सेवा समाप्त कर्मचारियों की याचिकाओं पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Saurabh Negi

Share