उत्तराखंड कैबिनेट ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को मंजूरी दी, आठ अहम प्रस्ताव पारित

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस नीति का उद्देश्य राज्य में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है। नीति के तहत ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रावधान किए गए हैं, जबकि सब्सिडी से जुड़े निर्णय मुख्य सचिव की अध्यक्षता में लिए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे निवेश आकर्षित होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
कैबिनेट बैठक में ऊर्जा नीति के साथ-साथ स्वास्थ्य, राजस्व, उद्योग और जनजातीय कल्याण से जुड़े कुल आठ महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में लंबे समय से लंबित मांगों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया कि पांच वर्ष की सेवा पूरी कर चुके स्वास्थ्य कर्मियों को आपसी सहमति के आधार पर जिले के भीतर स्थानांतरण की सुविधा दी जाएगी। इससे स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रशासनिक समस्याओं के समाधान में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्व विभाग से जुड़े फैसलों में सरकार ने यह प्रावधान मंजूर किया कि अब भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के अलावा आपसी सहमति से सीधे भूमि स्वामियों से जमीन खरीदी जा सकेगी। इसका उद्देश्य सरकारी परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्धता की प्रक्रिया को सरल बनाना है। इसके साथ ही कैबिनेट ने यह भी तय किया कि पराग फार्म से सिडकुल को आवंटित की गई भूमि को आगे किसी अन्य को बेचा या लीज पर नहीं दिया जाएगा, हालांकि सिडकुल को उप-लीज की अनुमति दी गई है।
जनजातीय कल्याण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए देहरादून और ऊधम सिंह नगर सहित चार जिलों में जिला जनजातीय कल्याण अधिकारी के चार नए पद सृजित करने को भी स्वीकृति दी गई। वहीं जल उपयोग से संबंधित एक बड़े निर्णय में औद्योगिक इकाइयों और आवासीय सोसायटियों पर जल शुल्क लगाने का फैसला किया गया है। गैर-कृषि उपयोग वाली भूमि को इससे बाहर रखा गया है, जबकि भूजल के व्यावसायिक उपयोग पर भी यूजर चार्ज वसूला जाएगा।
कैबिनेट ने उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दी है, जिससे राज्य में जीआरडी विश्वविद्यालय को निजी विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने का रास्ता साफ हो गया है। इस संशोधन से संबंधित अध्यादेश को विधानसभा के आगामी बजट सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे।
रणनीतिक और आधारभूत ढांचे से जुड़े एक अहम फैसले में कैबिनेट ने चिन्यालीसौड़ और गौचर हवाई पट्टियों को संयुक्त रूप से रक्षा मंत्रालय को सौंपने पर सहमति दी है। इन हवाई पट्टियों का संचालन संयुक्त रूप से किया जाएगा, जिससे नागरिक और रक्षा दोनों प्रकार की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी। सरकार का कहना है कि ये सभी निर्णय राज्य में बेहतर शासन, बुनियादी ढांचे के विकास और जनसेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।




