उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में 90 प्रतिशत प्राचार्य पद खाली

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में 90 प्रतिशत प्राचार्य पद खाली

उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक संकट गहराता जा रहा है। राज्य के सरकारी इंटर कॉलेजों में प्राचार्य के 90 प्रतिशत और हाई स्कूलों में प्रधानाध्यापक के 93 प्रतिशत पद लंबे समय से खाली हैं। इस स्थिति के कारण कार्यरत अधिकारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है और कई अधिकारी एक साथ कई पदों का कार्यभार संभाल रहे हैं।

सरकारी इंटर कॉलेजों में स्वीकृत 1,385 प्राचार्य पदों में से 1,250 पद रिक्त हैं। इसी तरह सरकारी हाई स्कूलों में 910 में से 850 प्रधानाध्यापक पद खाली पड़े हैं। इतने बड़े पैमाने पर रिक्तियों के कारण शैक्षणिक निगरानी, प्रशासनिक संचालन और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।

वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर भी यही स्थिति बनी हुई है। गढ़वाल मंडल में अपर निदेशक कंचन देवराड़ी वर्तमान में अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा के साथ-साथ अपर निदेशक बेसिक शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं। कुमाऊं मंडल में गजेंद्र सिंह सौन अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा के साथ अपर निदेशक बेसिक शिक्षा का दायित्व निभा रहे हैं।

अपर निदेशक पदमेंद्र सकलानी एक साथ तीन जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। वे अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा, एससीईआरटी और शिक्षा निदेशालय का कार्यभार देख रहे हैं। इसके अलावा चमोली, रुद्रप्रयाग और ऊधम सिंह नगर जिलों में मुख्य शिक्षा अधिकारी के पद भी खाली हैं, जहां कनिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

इस वर्ष विभाग में बड़े स्तर पर सेवानिवृत्तियां भी प्रस्तावित हैं। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल इसी माह सेवानिवृत्त होंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती जून में रिटायर होंगे। अपर निदेशक कंचन देवराड़ी अप्रैल में और अपर निदेशक गजेंद्र सिंह सौन नवंबर में सेवानिवृत्त होंगे।

इसके अलावा इस वर्ष उप निदेशक मेहरबान सिंह बिष्ट, बीईओ हर्ष बहादुर चंद, उप निदेशक कुंवर सिंह रावत, अत्रेश सयाना, हवलदार प्रसाद, नरेश कुमार, विजयपाल सिंह, चंदन सिंह बिष्ट और प्रकाश सिंह जंगपांगी भी सेवा से निवृत्त होंगे।

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शिक्षा विभाग में नेतृत्व स्तर पर इतनी अधिक रिक्तियां उत्तराधिकार योजना और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। समय पर नियुक्तियां नहीं होने की स्थिति में सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक व्यवस्था और शिक्षण व्यवस्था पर असर और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

 

Saurabh Negi

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