उत्तराखंड में पंचायत भवनों के लिए राज्य अंश दोगुना करने की तैयारी, प्रस्ताव सरकार को भेजा गया
उत्तराखंड सरकार राज्य भर में पंचायत भवनों के निर्माण को गति देने के लिए अपनी वित्तीय हिस्सेदारी दोगुनी करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के बाद पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेज दिया है। प्रस्ताव का उद्देश्य लंबे समय से लंबित पंचायत भवन निर्माण कार्यों को पूरा करना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत पंचायत भवन निर्माण के लिए राज्य सरकार की ओर से 10 लाख रुपये दिए जाते हैं, जबकि केंद्र सरकार 20 लाख रुपये का सहयोग करती है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य अंश कम होने के कारण कई पंचायत भवनों का निर्माण अधूरा रह गया है। विशेष रूप से दूरस्थ और पहाड़ी इलाकों में लागत बढ़ने से कार्य समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है।
पंचायती राज विभाग के उप निदेशक मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि राज्य सरकार की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव को वित्त विभाग को भेजा गया है। वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष अंतिम निर्णय के लिए रखा जाएगा। विभाग का मानना है कि केंद्र और राज्य की समान भागीदारी से निर्माण प्रक्रिया में तेजी आएगी।
राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने के बाद भी उत्तराखंड में पंचायत स्तर पर बुनियादी ढांचे की कमी बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1,300 से अधिक पंचायत भवनों की आवश्यकता है। इनमें से 803 ग्राम पंचायतों के पास अभी तक अपना भवन नहीं है, जबकि कई पंचायतें जर्जर और असुरक्षित इमारतों में काम कर रही हैं।
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पंचायती राज विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों से पंचायत भवनों की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य अंश में वृद्धि से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। सरकार इस कदम को जमीनी स्तर पर शासन को सशक्त बनाने की दिशा में अहम मान रही है।




