उत्तराखंड में बड़ी प्रशासनिक चूक, अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दो माह तक अटका रहा

उत्तराखंड में बड़ी प्रशासनिक चूक, अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दो माह तक अटका रहा

उत्तराखंड में प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है, जहां पीएसी के एक जवान की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सरकारी आदेश करीब दो महीने तक लागू ही नहीं हो पाया। आदेश पुलिस मुख्यालय तक नहीं पहुंचने के कारण संबंधित कर्मचारी दिसंबर में सेवानिवृत्त होने के बावजूद ड्यूटी करता रहा।

यह मामला प्रांतीय सशस्त्र बल की 40वीं वाहिनी में तैनात दलनायक खजांची लाल से जुड़ा है। बीते वर्ष उन पर अनियमितताओं के कई आरोप लगे थे। विभागीय जांच कराई गई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद गृह विभाग ने भी मामले की जांच की और मुख्यमंत्री की सहमति के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति को मंजूरी दी गई।

खजांची लाल की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश 16 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। सामान्य तौर पर ऐसे आदेश कुछ ही दिनों में पुलिस मुख्यालय तक पहुंच जाते हैं, लेकिन इस मामले में पत्र एक भी प्रशासनिक स्तर पार नहीं कर पाया। इसके चलते दिसंबर में सेवा समाप्त होनी थी, लेकिन वह लगभग दो महीने तक ड्यूटी पर बने रहे।

मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को मिलने के बाद सरकार की मंजूरी से 4 फरवरी को नया आदेश जारी किया गया। इसमें आईजी पीएसी को सेवानिवृत्ति का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो गए।

इसे भी पढ़ें – चमोली में सीता माता मंदिर जर्जर, तीन साल से पुजारी के कमरे में रखी है प्रतिमा

पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने इस चूक को गंभीर बताया है और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी डीआईजी पीएसी मुकेश कुमार को सौंपी गई है। जांच में यह देखा जाएगा कि आदेश किस स्तर पर रोका गया और क्या इसे जानबूझकर दबाया या भटकाया गया था।

Saurabh Negi

Share