उत्तराखंड पंचायत सीटें: खाली पदों से हटेगा आरक्षण, प्रस्ताव सरकार को भेजा गया
उत्तराखंड में पंचायत सीटों को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। पंचायती राज निदेशालय ने सैकड़ों खाली पड़े पदों से आरक्षण हटाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। यह कदम उन पदों को भरने के लिए उठाया गया है, जो बार-बार चुनाव के बावजूद खाली रह गए हैं।
जानकारी के अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित 3,846 ग्राम पंचायत सदस्य पद अब तक खाली हैं। दो बार चुनाव होने के बावजूद इन पदों पर कोई उम्मीदवार सामने नहीं आया। ऐसे में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर बाकी सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि चुनाव कराए जा सकें।
जिलाधिकारियों की सिफारिश पर यह प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछली बार नामांकन नहीं होने के कारण ये सीटें खाली रह गईं। जुलाई में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अधिकांश पद भर गए थे, लेकिन ग्राम पंचायत सदस्यों के कई पद खाली रह गए।
इसके बाद उपचुनाव भी कराए गए, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। वर्तमान में 3,846 ग्राम पंचायत सदस्य पदों के अलावा 16 ग्राम प्रधान और तीन क्षेत्र पंचायत सदस्य पद भी खाली हैं। इससे कई गांवों में कामकाज प्रभावित हो रहा है।
33 ग्राम पंचायतों में प्रधान चुने जाने के बाद भी शपथ नहीं हो सकी है। कारण यह है कि आवश्यक सदस्यों की संख्या पूरी नहीं हो पाई। इससे स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों पर असर पड़ा है।
राज्य में कुल 7,817 ग्राम पंचायतें, 3,195 क्षेत्र पंचायत सदस्य पद और 402 जिला पंचायत सदस्य पद हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकार से मंजूरी मिलने के बाद इन सीटों पर तीसरी बार चुनाव कराए जाएंगे।
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पंचायती राज निदेशक निधि यादव ने पुष्टि की है कि प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
