उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी, 3,670 प्रवक्ता पद खाली

उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में विषय शिक्षकों की बड़ी कमी सामने आई है। राज्य में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों के कुल 3,670 प्रवक्ता पद खाली हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होने जा रही है, ऐसे में यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार राज्य के 1,385 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता पदों की वास्तविक स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में नए सत्र से पहले इन पदों को भरने की संभावना भी कम दिखाई दे रही है। इससे कई विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी बनी रह सकती है।
वर्तमान में एलटी संवर्ग से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति की प्रक्रिया भी रुकी हुई है। यह मामला नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, जिसके कारण पदोन्नति आगे नहीं बढ़ पा रही है। वहीं इस वर्ष नए प्रवक्ताओं की सीधी भर्ती को लेकर भी कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों में पहले से ही शिक्षकों की कमी बनी हुई है। दूरस्थ पर्वतीय जिलों में यह समस्या और अधिक गंभीर है, जहां विद्यालयों को विषय विशेषज्ञ शिक्षक मिलना मुश्किल हो जाता है।
मैदानी जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में अपेक्षाकृत कम पद खाली हैं, क्योंकि अधिकांश शिक्षक इन सुगम क्षेत्रों में सेवा देना पसंद करते हैं। वहीं उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चंपावत और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में शिक्षकों के अधिक पद रिक्त हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि उत्तराखंड बोर्ड से संबद्ध सरकारी विद्यालयों में कार्यरत करीब 814 एलटी और प्रवक्ता स्तर के शिक्षक अप्रैल में अपने वर्तमान विद्यालयों से कार्यमुक्त किए जाएंगे। इन्हें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध 186 अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में तैनात किया जाएगा। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी और बढ़ सकती है।
अतिथि शिक्षकों की नीति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। पहले अस्थायी रिक्तियों को भरने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती थी। हाल ही में 1,346 एलटी शिक्षकों की नियुक्ति के बाद 205 अतिथि शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। पहले यह आश्वासन दिया गया था कि स्थायी नियुक्तियों के बाद अतिथि शिक्षकों को अन्य विद्यालयों में समायोजित किया जाएगा, जिससे उनमें असंतोष देखा जा रहा है।
राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के साथ ही जल्द ही नई भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि विद्यालयों में विषय शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।




