विक्रम शर्मा हत्याकांड में कई दुश्मन और विस्तृत नेटवर्क, जांच और जटिल

झारखंड के कुख्यात अपराधी विक्रम शर्मा की हत्या की जांच लगातार जटिल होती जा रही है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे कई पुरानी रंजिशें और एक विस्तृत सहयोगी नेटवर्क शामिल हो सकता है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि साजिश बेहद योजनाबद्ध तरीके से रची गई, जो किसी अपराध-थ्रिलर की पटकथा जैसी प्रतीत होती है।
सूत्रों के अनुसार, तीन शूटर अलग-अलग साधनों से हरिद्वार पहुंचे थे। वहीं एकत्र होने के बाद वे देहरादून आए, जहां हत्या को अंजाम दिया गया। वारदात के बाद आरोपी एक साथ मौके से निकले, लेकिन हरिद्वार के आगे अलग-अलग रास्तों और साधनों से फरार हो गए, ताकि पुलिस से बचा जा सके।
जांच के दौरान पुलिस ऐसे कई लोगों की पहचान कर रही है, जिनकी विक्रम शर्मा से पुरानी दुश्मनी थी। साथ ही यह भी सामने आया है कि शूटरों को झारखंड से लेकर उत्तराखंड तक फैले कई संपर्कों से मदद मिली। इस विस्तृत नेटवर्क के कारण पूरे षड्यंत्र की कड़ियां जोड़ना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, विक्रम शर्मा झारखंड के अपराध जगत में एक बड़ा नाम था। उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वह 2007 में सकची आम बगान के पास कारोबारी आशीष डे की हत्या और 2008 में बिष्टुपुर में टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की हत्या जैसे मामलों में भी आरोपी रहा है।
सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने और अपने सहयोगी अखिलेश सिंह को मजबूत करने की कोशिशों के चलते उसकी कई गिरोहों से टकराव बढ़ा। दादेय यादव और बड़ा निजाम जैसे अपराधियों से उसकी पुरानी रंजिश रही, जिनकी बाद में हत्या हो चुकी है। हाल के समय में गणेश सिंह के साथ भी तनाव की बात सामने आई है।
इसे भी पढ़ें – उत्तराखंड में वनाग्नि सीजन शुरू, गर्मी से पहले 42 हेक्टेयर जंगल जले
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि विक्रम शर्मा का आपराधिक इतिहास और उसका फैला हुआ नेटवर्क जांच को और कठिन बना रहा है। एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और यात्रा विवरण खंगाल रही हैं, ताकि साजिश की पूरी श्रृंखला उजागर की जा सके। जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे व गिरफ्तारियां संभव बताई जा रही हैं।




