लोकसभा में 6 नई भाषाओं में अनुवाद: स्पीकर ओम बिरला ने की घोषणा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, उर्दू और संस्कृत सहित छह नई भाषाओं में अनुवाद सेवाओं के विस्तार की घोषणा की। इससे पहले, हिंदी और अंग्रेजी के अलावा, 10 भाषाओं में यह सुविधा उपलब्ध थी। अब, इन छह नई भाषाओं को शामिल करने के साथ, अनुवाद सेवाओं का दायरा और बढ़ाया गया है।
ओम बिरला ने कहा कि संसदीय प्रणाली को और समावेशी बनाने के लिए 16 अतिरिक्त भाषाओं में भी अनुवाद सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस बहुभाषी अनुवाद प्रयास की सराहना की गई है।
इस बीच, डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने संस्कृत भाषा में अनुवाद पर आपत्ति जताते हुए इसे करदाताओं के पैसे की बर्बादी बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत को बहुत कम लोग बोलते हैं, इसलिए इसे अनुवाद सेवाओं में शामिल करना गैरजरूरी है। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि संस्कृत भारत की मूल भाषा रही है और 22 आधिकारिक भाषाओं के साथ इसका सम्मान किया जाना चाहिए।