वाह रे शिक्षा विभाग – एक ही विद्यालय कुछ शिक्षकों के लिए सुगम, कुछ के लिए दुर्गम

वाह रे शिक्षा विभाग – एक ही विद्यालय कुछ शिक्षकों के लिए सुगम, कुछ के लिए दुर्गम

शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजब गजब हैं। एक ही विद्यालय कुछ के लिए सुगम, कुछ शिक्षकों के लिए दुर्गम बना है। राज्य में इस तरह के इक्का-दुक्का नहीं बल्कि 155 अटल उत्कृष्ट विद्यालय हैं। जिनके शिक्षकों को एक ही विद्यालय में तैनाती के बावजूद समान लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिससे शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट के मुताबिक शिक्षकों को समान लाभ मिले इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। शासनादेश के बाद ही समान व्यवस्था लागू हो सकेगी। प्रदेश में इन दिनों शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया चल रही है। अनिवार्य और अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए शिक्षकों की सूची तैयार की जा रही है,लेकिन विभाग के एक ही विद्यालय में तैनाती के बावजूद कुछ शिक्षकों की सेवा को दुर्गम तो कुछ की सेवा को सुगम में जोड़े जाने से शिक्षक हैरान हैं।

हर ब्लॉक के दो विद्यालयों को अटल उत्कृष्ट विद्यालय बनाए
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व के शासनादेश की वजह से इस तरह की स्थिति बनी है। सुगम क्षेत्र के राजकीय अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में चयनित होकर आए शिक्षकों की सुगम क्षेत्र की सेवा को तबादलों में दुर्गम क्षेत्र की सेवा के रूप में जोड़ा जा रहा है। वहीं इसी विद्यालय के पूर्व से तैनात शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवाओं को सुगम क्षेत्र की सेवा में जोड़ा जा रहा है। अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में पूर्व से तैनात शिक्षकों और कर्मचारियों का कहना है कि विभाग की इस व्यवस्था से एक ही विद्यालय कुछ शिक्षकों के लिए दुर्गम और कुछ शिक्षकों के लिए सुगम माना जा रहा है, जो उनके साथ अन्याय है। शिक्षकों का कहना है कि प्रकरण को लेकर दो दिन पहले वह शिक्षा सचिव रविनाथ रमन से मिल चुके हैं। उन्होंने शिक्षा सचिव को बताया कि शासन ने हर ब्लॉक के दो विद्यालयों को अटल उत्कृष्ट विद्यालय बनाया है। इन विद्यालयों में जो पद खाली हैं, उन पदों को चयन परीक्षा के माध्यम से भरा जा रहा है। जबकि इन विद्यालयों में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को चयन परीक्षा में शामिल नहीं किया गया।

सिफारिश के बाद भी शिक्षकों को नहीं मिल रहा समान लाभ

अटल उत्कृष्ट विद्यालयों में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से विकल्प भरवाकर अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने की सहमति ली गई थी। जिन शिक्षकों ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने की सहमति दी उनके कार्यों का परीक्षण करने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में एक चयन समिति बनाई गई। इस समिति ने साक्षात्कार के माध्यम से शिक्षकों को चयनित कर विभाग को अपनी सिफारिश भेजी, लेकिन शिक्षकों को समान लाभ नहीं मिल रहा ।

शासन ने इस तरह से की है व्यवस्था

अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक चयनित शिक्षकों की सुगम की एक साल की सेवा को दुर्गम की सेवा में जोड़ा जा रहा है। वहीं उनकी दुर्गम विद्यालय में की गई एक साल की सेवा को दुर्गम की दो साल की सेवा के रूप में जोड़ा जा रहा है। जबकि इन विद्यालयों में पूर्व से कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा को विद्यालय यदि सुगम में है तो सुगम और यदि दुर्गम में है तो दुर्गम सेवा के रूप में जोड़ा जा रहा है।

सुगम क्षेत्र के विद्यालयों में दोहरी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, विद्यालय सुगम है तो सेवा सुगम में ही शिक्षकों की सेवा जोड़ी जानी चाहिए। शिक्षकों के लिए समान व्यवस्था हो इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। -महावीर सिंह बिष्ट, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share