आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम, जानिए

आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम, जानिए

नई दिल्ली। पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अब केंद्रीय पुलिस बल के जवानों के लिए हवाई यात्रा के लिए भत्ते को मंजूरी दे दी है। इससे पहले केंद्रीय पुलिस बलों के नौजवानों के लिए इस तरह के प्रावधान नहीं थे। नए आदेशों के मुताबकि केंद्रीय पुलिस बल के जवानों को दिल्ली से श्रीनगर, श्रीनगर से दिल्ली, जम्मू से श्रीनगर और श्रीनगर से जम्मू जाने के लिए यात्रा भत्ता (TA) मिलेगा।

गृह मंत्रालय के मुताबिक इस फैसले से करीब 7 लाख 80 हजार जवानों को तुरंत फायदा मिलेगा। इसमें केंद्रीय पुलिस बल के सभी रैंक के जवान और अधिकारी शामिल हैं। इससे पहले इन बलों में कॉन्स्टेबल, हेड कॉन्स्टेबल और एएसआइ रैंक के कर्मियों को यात्रा भत्ता नहीं मिलता था। खास बात ये है कि यह यात्रा भत्ता चाहे जवान ड्यूटी के लिए यात्रा कर रहा हो या छुट्टी के लिए, दोनों ही परिस्थितियों में लागू होगा। इस फैसले के बाद अब जवानों को घर पहुंचने भी कम टाइम लगेगा और घर से ड्यूटी पर जाने में भी।

पहले भी थी सुविधा

गौरतलब है कि इससे पहले केंद्रीय पुलिस बल के जवानों के लिए जम्मू-श्रीनगर-जम्मू के लिए हवाई यात्रा की सुविधा दी गई थी। जिसे दिसंबर, 2017 में दिल्ली से जम्मू, जम्मू से श्रीनगर, श्रीनगर से जम्मू और जम्मू से दिल्ली के लिए भी बढ़ाया गया। दिसंबर, 2018 में सरकार ने यहां के लिए फ्लाइट्स की संख्या को भी बढ़ा दिया। इसके अलावा जवानों की हवाई यात्रा के लिए वायुसेना की भी जरूरत के वक्त पर मदद ली जाती है।

क्यों लिया ये फैसला?

गौरतलब है कि पुलवामा में आतंकी हमले से पहले सैन्य और पुलिस बलों की ओर से सरकार को जवानों को निकालने के लिए हवाई यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिए पत्र लिखे गए। लेकिन गृहमंत्रालय ने जवानों की हवाई यात्रा को मंजूरी नहीं दी और सड़क मार्ग से आने को कहा।

जिसके बाद 14 फरवरी को जब जवानों का काफिला लौट रहा था तो उस पर कश्मीर में आतंकी हमला हो गया और करीब 40 जवान मारे गए। इस बात का खुलासा होने पर सरकार को बहुत आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। शुक्रवार को कांग्रेस ने ये सवाल किया कि जवानों को हवाई यात्रा क्यों नहीं दी गई। ऐसा होता तो जवानों की जान बच सकती थी।

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