उत्तराखंड बना प्रमुख वन्यजीव केंद्र, बाघ-हाथियों की संख्या में लगातार वृद्धि
उत्तराखंड ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। राज्य में बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य का लगभग 71.05 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र वनाच्छादित है, जिससे यह देश के प्रमुख वन्यजीव आवासों में शामिल हो गया है।
संरक्षण प्रयासों के चलते बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2003 में जहां राज्य में बाघों की संख्या 245 थी, वहीं 2022 की गणना में यह बढ़कर 560 हो गई। मौजूदा आकलन के अनुसार यह संख्या 600 के पार जा सकती है। बाघ अब केवल Jim Corbett National Park और Rajaji National Park तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्रों में भी उनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। मध्यमहेश्वर क्षेत्र में लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई पर कैमरा ट्रैप में बाघ की पुष्टि हो चुकी है।
हाथियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2003 में 1,582 हाथियों की तुलना में 2020 में इनकी संख्या 2,026 तक पहुंच गई। यह गणना यमुना से शारदा नदी तक फैले लगभग 6,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में की गई थी। मौजूदा जनगणना के बाद नए आंकड़े सामने आने की संभावना है।
हिम तेंदुओं के संरक्षण में भी राज्य को सफलता मिली है। वर्ष 2005 में इनकी संख्या 30 थी, जो 2022 में बढ़कर 124 हो गई। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी और आवास संरक्षण से यह संभव हो पाया है।
राज्य के लगभग 16 प्रतिशत वन क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्यजीव अभयारण्य और चार संरक्षण रिजर्व शामिल हैं। Nanda Devi National Park, Valley of Flowers National Park और Gangotri National Park जैसे उद्यान जैव विविधता के प्रमुख केंद्र हैं।
राष्ट्रीय उद्यानों का क्षेत्रफल करीब 5,028 वर्ग किलोमीटर है, जबकि वन्यजीव अभयारण्यों का विस्तार लगभग 2,683 वर्ग किलोमीटर में है। संरक्षण रिजर्व 21 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीवों की बढ़ती संख्या के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष भी एक चुनौती बना हुआ है, जिस पर निरंतर निगरानी और प्रबंधन की आवश्यकता है।




