बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल ने कबूला जुर्म, लापता डीवीआर रिकॉर्डिंग की रिपोर्ट का इंतजार

बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल ने कबूला जुर्म, लापता डीवीआर रिकॉर्डिंग की रिपोर्ट का इंतजार

चमोली में बदरीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) अब मंदिर के सीसीटीवी डीवीआर से डाटा रिकवर होने का इंतजार कर रहा है। डीवीआर को जांच के लिए देहरादून स्थित फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा गया है।

दूसरी ओर, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति भी मामले की जांच में जुटी है। समिति ने बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के दो लेखाकारों और तोशाखाना से जुड़े कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है।

एसआईटी की पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी और बीकेटीसी के निजी सहायक प्रमोद नौटियाल ने कथित तौर पर चढ़ावे की चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इसके बाद जांच एजेंसी उनके बैंक खातों, भूमि खरीद और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

चमोली के पुलिस अधीक्षक सर्वजीत सिंह पंवार ने बताया कि जांच के दौरान बीकेटीसी के कुछ अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और तथ्य सामने आने की संभावना है।

पुलिस ने चालू वर्ष के चढ़ावे का मिलान मंदिर के तोशाखाना में रखे अभिलेखों से कर लिया है। अब पिछले वर्षों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता का पता लगाया जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि एफएसएल से डीवीआर की रिपोर्ट मिलने के बाद जांच को और महत्वपूर्ण सुराग मिलेंगे।

एसआईटी के अनुसार, बीकेटीसी ने जांच के लिए केवल 13 दिनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई है, जबकि 32 दिनों की रिकॉर्डिंग गायब है। समिति ने पहले दावा किया था कि 45 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित है, लेकिन बाद में तकनीकी खराबी के कारण शेष रिकॉर्डिंग उपलब्ध न होने की जानकारी दी।

इस बीच, गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने कार्यवाहक मंदिर अधिकारी और वीआईपी प्रोटोकॉल शाखा से जुड़े तीन कर्मचारियों के भी बयान दर्ज किए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों ने वीआईपी और वीवीआईपी प्रोटोकॉल से जुड़ी व्यवस्थाओं में प्रमोद नौटियाल की भूमिका का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रोटोकॉल से संबंधित अनुमतियां नौटियाल के हस्ताक्षर से जारी होती थीं और शुल्क भी उनके निर्देश पर लिया जाता था।

समिति ने अब बीकेटीसी के दो लेखाकारों और तोशाखाना से जुड़े अधिकारियों को भी तलब किया है। तोशाखाना में प्रसाद, चंदन, केसर, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए वस्त्र और अन्य धार्मिक सामग्री सुरक्षित रखी जाती है, जिन्हें बाद में निर्धारित प्रक्रिया के तहत श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप उपलब्ध कराया जाता है।

 

Saurabh Negi

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