अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर छात्रों से वसूली का आरोप, फर्जी पत्र बनाकर धन जुटाने का मामला

अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर छात्रों से वसूली का आरोप, फर्जी पत्र बनाकर धन जुटाने का मामला

अल्मोड़ा: मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर स्कूलों के छात्रों से धनराशि एकत्र करने के आरोप में शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। आरोप है कि एक जादूगर ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) कार्यालय का फर्जी पत्र तैयार कर सरकारी और निजी विद्यालयों में छात्रों से पैसे वसूले।

शिक्षा विभाग के अनुसार, आरोपी ने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्र का फर्जी संस्करण तैयार कर विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इस फर्जी पत्र में प्रत्येक छात्र से 10 रुपये एकत्र करने और एकत्रित राशि का 30 प्रतिशत मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करने का उल्लेख किया गया था।

मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि धनराशि एकत्र करने की अनुमति देने वाला पत्र पूरी तरह फर्जी है। विभाग ने मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

अधिकारियों ने बताया कि 16 मई को जारी मूल पत्र के तहत हरियाणा निवासी महेश शर्मा को सरकारी, सहायता प्राप्त, निजी मान्यता प्राप्त, सीबीएसई और आईसीएसई विद्यालयों में वैज्ञानिक जादू शो और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई थी।

अनुमति पत्र में स्पष्ट रूप से यह शर्त रखी गई थी कि जल संरक्षण, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता और अंधविश्वास उन्मूलन जैसे विषयों पर होने वाले सभी कार्यक्रम पूरी तरह निशुल्क होंगे और किसी भी छात्र से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

विभाग का आरोप है कि आरोपी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से मूल पत्र में फेरबदल कर फर्जी अनुमति पत्र तैयार किया और उसके आधार पर छात्रों से धनराशि एकत्र करनी शुरू कर दी। विभाग का कहना है कि इस प्रकार की शिकायतें पहले भी मिली थीं, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

मुख्य शिक्षा अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि विभाग ने केवल निशुल्क जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी थी। यदि किसी ने मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर छात्रों या विद्यालयों से धनराशि वसूली है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि धन संग्रह के लिए इस्तेमाल किया जा रहा पत्र पूरी तरह फर्जी है।

Saurabh Negi

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