श्री देव सुमन विश्वविद्यालय में गढ़भोज दिवस पर सजी उत्तराखंड की पारंपरिक थाली

श्री देव सुमन विश्वविद्यालय में गढ़भोज दिवस पर सजी उत्तराखंड की पारंपरिक थाली

टिहरी गढ़वाल के चंद्रबदनी स्थित श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में गढ़भोज दिवस पर पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी आयोजित की गई। सात अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं ने गढ़वाली और कुमाऊँनी व्यंजन प्रस्तुत कर उत्तराखंड की समृद्ध खाद्य संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक दिखाई।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक खान-पान, स्थानीय खाद्य पदार्थों के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी लाभों से परिचित कराना था। इस दौरान छात्राओं ने उत्तराखंड के पारंपरिक परिधान पहनकर लोक-संस्कृति को प्रदर्शित किया। उन्होंने विभिन्न पहाड़ी व्यंजन तैयार किए और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, पोषक तत्वों तथा स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी।

प्रदर्शनी में मंडुवा, झंगोरा, भट्ट, गहत, राजमा और तिल सहित स्थानीय अनाज, दालों और खाद्य पदार्थों से बने व्यंजन शामिल रहे। छात्राओं ने बताया कि पहाड़ी भोजन स्वाद के साथ पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय अनाज, दालें, मोटे अनाज और मौसमी सब्जियां संतुलित आहार का अहम हिस्सा हैं।

पारंपरिक खान-पान को बढ़ावा देने पर जोर

कार्यक्रम में प्राचार्य मेहंत मौर्य ने कहा कि गढ़भोज दिवस पारंपरिक खाद्य संस्कृति को समझने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनाज और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देकर सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्वस्थ खान-पान को भी प्रोत्साहित किया जा सकता है।

डॉ. दीक्षित ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक थाली यहां की भौगोलिक परिस्थितियों, जीवनशैली और लोक परंपराओं से जुड़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्थानीय खाद्य पदार्थों के उपयोग और संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

डॉ. थपलियाल ने कहा कि पारंपरिक व्यंजन उत्तराखंड की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। आधुनिक खान-पान के बढ़ते प्रभाव के बीच पारंपरिक खाद्य पदार्थों को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ना जरूरी है।

छात्राओं ने तैयार किए पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन

कार्यक्रम का आयोजन गृह विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. पूजा के मार्गदर्शन में किया गया। छात्राओं सुमन, दिव्या, निकिता, निशा, सोनम, अंशिका, गीतांजलि और समीक्षा ने पारंपरिक परिधान पहनकर विभिन्न पहाड़ी व्यंजन तैयार किए और उनकी प्रदर्शनी लगाई।

कार्यक्रम के माध्यम से पारंपरिक भोजन में स्वाद, पोषण और संस्कृति के महत्व का संदेश दिया गया। आयोजन में परिसर के सभी प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा की।

admin

Share