उत्तराखंड से 5 जुलाई को रवाना होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा की पहली टोली, मुख्यमंत्री धामी दिखाएंगे हरी झंडी

उत्तराखंड से 5 जुलाई को रवाना होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा की पहली टोली, मुख्यमंत्री धामी दिखाएंगे हरी झंडी

टनकपुर: उत्तराखंड मार्ग से वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा 5 जुलाई से शुरू होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी टनकपुर स्थित पर्यटन आवास गृह से श्रद्धालुओं की पहली टोली को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। यात्रा का पहला जत्था 4 जुलाई की शाम टनकपुर पहुंचेगा, जहां से अगले दिन यात्रा शुरू होगी।

यात्रा की तैयारियों को लेकर कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री सचिव दीपक रावत की अध्यक्षता में हल्द्वानी कैंप कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि यात्रा को सुरक्षित, सुचारु और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया जाए तथा श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं को और बेहतर बनाया जाए।

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के नोडल अधिकारी केदार बृजवाल ने बताया कि पहली टोली को 5 जुलाई को मुख्यमंत्री द्वारा रवाना किया जाएगा। वहीं टीआरसी प्रबंधक मनोज कुमार के अनुसार इस वर्ष यात्रा के लिए कुल 10 दल निर्धारित किए गए हैं और प्रत्येक दल में करीब 50 श्रद्धालु शामिल होंगे।

टनकपुर से कैलाश मानसरोवर तक की पूरी यात्रा 18 दिनों में पूरी होगी। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने पहली बार इस यात्रा मार्ग का संचालन शुरू किया था। तब पांच दलों में पंजीकृत 250 यात्रियों में से 237 श्रद्धालुओं ने यात्रा पूरी की थी, जबकि 13 लोग चिकित्सकीय रूप से अयोग्य पाए गए थे।

पहली टोली 30 जून को दिल्ली में एकत्रित होगी। एक जुलाई को यात्रियों की चिकित्सकीय जांच और वीजा संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद 2 जुलाई को आईटीबीपी कैंप में अतिरिक्त स्वास्थ्य परीक्षण होगा। 3 जुलाई को शुल्क संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यात्री 4 जुलाई को टनकपुर पहुंचेंगे।

5 जुलाई को श्रद्धालु टनकपुर से धारचूला के लिए रवाना होंगे। इसके बाद यात्रा गुंजी और नाभीढांग होते हुए लिपुलेख दर्रे के रास्ते चीन सीमा में प्रवेश करेगी।

अन्य दलों के टनकपुर पहुंचने की तिथियां 8, 12, 16, 20, 24 और 28 जुलाई के साथ 1, 5 और 9 अगस्त तय की गई हैं। प्रत्येक दल टनकपुर में रात्रि विश्राम करेगा और अगले दिन यात्रा पर आगे बढ़ेगा।

प्रशासन का मानना है कि यात्रा के सफल संचालन से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा। हालांकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।

Saurabh Negi

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