चमोली टनल हादसा: दिसंबर 2025 में भी हुआ था बड़ा हादसा, सिल्क्यारा से नहीं ली गई सीख

चमोली टनल हादसा: दिसंबर 2025 में भी हुआ था बड़ा हादसा, सिल्क्यारा से नहीं ली गई सीख

चमोली: चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की मुख्य सुरंग में हादसा पहली बार नहीं हुआ है। दिसंबर 2025 में भी इसी सुरंग में लोको ट्रॉलियों की टक्कर से 100 से अधिक कर्मचारी, अधिकारी और श्रमिक घायल हुए थे। इसके बावजूद सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

दिसंबर 2025 में लोको ट्रॉलियों की टक्कर से हुआ था हादसा

31 दिसंबर 2025 को परियोजना की मुख्य सुरंग में कर्मचारियों और श्रमिकों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दो लोको ट्रॉलियां आपस में टकराकर पलट गई थीं।

परियोजना में सुरंग के भीतर आवाजाही के लिए पटरी पर चलने वाली लोको ट्रेन का इस्तेमाल किया जाता था। घटना के दिन एक लोको ट्रेन को निर्माण स्थल पर छोड़कर संचालक चला गया था। इसके बाद लोको ट्रेन अपने आप चल पड़ी और शिफ्ट लेकर जा रही दूसरी लोको ट्रेन से टकरा गई।

इस हादसे में 100 से अधिक कर्मचारी, अधिकारी और श्रमिक घायल हुए थे। इनमें करीब 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्य सुरंग में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश और प्रयास किए गए थे।

सिल्क्यारा हादसे के बाद भी सुरक्षा पर सवाल

चमोली की मौजूदा घटना ने उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग हादसे की यादें भी ताजा कर दी हैं। 12 नवंबर 2023 को सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा भूस्खलन के कारण धंस गया था। इसमें 41 श्रमिक अंदर फंस गए थे। करीब 17 दिन तक चले चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान के बाद सभी श्रमिकों को बाहर निकाला गया था।

इन घटनाओं के बावजूद पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।

प्रमुख परियोजनाओं में पहले भी हो चुके हैं हादसे

चमोली और उत्तराखंड की प्रमुख जल विद्युत एवं सुरंग परियोजनाओं में पिछले वर्षों में कई हादसे सामने आ चुके हैं। इनमें वर्ष 2010 में ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में भूस्खलन से तीन मजदूरों की मौत, वर्ष 2011 में चट्टान गिरने से एक व्यक्ति की मौत और वर्ष 2021 में तपोवन-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना शामिल है।

वर्ष 2023 में सिल्क्यारा सुरंग में 41 श्रमिक 17 दिनों तक फंसे रहे। वर्ष 2025 में तपोवन-विष्णुगाड़ परियोजना में भूस्खलन से श्रमिक घायल हुए, जबकि पीपलकोटी-विष्णुगाड़ परियोजना में लोको ट्रॉली हादसे में 15 श्रमिक घायल हुए थे।

वर्ष 2026 में सिल्क्यारा सुरंग में मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत की घटना भी सामने आई है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बीच चमोली के ताजा हादसे ने सुरंग निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन, नियमित निरीक्षण और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Saurabh Negi

Share