उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शुरू किया होमस्टे प्रबंधन डिप्लोमा, गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा के नए पाठ्यक्रम भी लॉन्च
देहरादून: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई नए रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें एक वर्षीय होमस्टे प्रबंधन डिप्लोमा प्रमुख है, जिसे राज्य में तेजी से बढ़ रहे होमस्टे क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी श्री देव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पीएलएमएस परिसर स्थित अध्ययन केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। होमस्टे प्रबंधन (होमस्टे सहायक प्रबंधक) डिप्लोमा में विद्यार्थियों को आतिथ्य सेवा, पर्यटक प्रबंधन, ग्राहक सेवा, विपणन और होमस्टे संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध होने की उम्मीद है।
विश्वविद्यालय ने राज्य की भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गढ़वाली, कुमाऊंनी और नेपाली भाषाओं में एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य स्थानीय भाषाओं के संरक्षण के साथ-साथ भाषा आधारित रोजगार, शोध और सांस्कृतिक अध्ययन के अवसरों को बढ़ावा देना है।
वर्तमान में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में 35 स्नातकोत्तर, 15 स्नातक, 16 एक वर्षीय डिप्लोमा और 29 प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय में पूरे राज्य से 80 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें से 16 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं देहरादून क्षेत्र से हैं।
देहरादून क्षेत्र में विश्वविद्यालय के 22 महाविद्यालयों में अध्ययन केंद्र संचालित हैं। इस शैक्षणिक सत्र से नेपाली विद्यार्थियों के लिए भी प्रवेश की सुविधा शुरू की गई है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिल सकेंगे। सहायक क्षेत्रीय निदेशक गोविंद सिंह रावत ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया 1 जुलाई से शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि होमस्टे प्रबंधन डिप्लोमा का उद्देश्य पर्यटन आधारित कौशल विकास को बढ़ावा देना और युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना है।
उत्तराखंड में पर्यटन और होमस्टे क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में कौशल आधारित पाठ्यक्रम स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
