बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: बीकेटीसी ने जांच समिति को सौंपे वित्तीय अभिलेख, सभी मंदिरों में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी के निर्देश
बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गिनती में कथित अनियमितताओं के मामले के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समिति से जुड़े मंदिरों, अतिथि गृहों और शैक्षणिक संस्थानों के अधिकारियों के साथ बैठक कर नए निर्देश जारी किए।
बैठक में बदरीनाथ मंदिर, केदारनाथ मंदिर, ओंकारेश्वर मंदिर (ऊखीमठ), नृसिंह मंदिर (ज्योतिर्मठ) सहित अन्य मंदिरों के अधिकारियों को श्रद्धालुओं से प्राप्त होने वाले चढ़ावे के प्रबंधन में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि सभी दानराशि का सही तरीके से आधिकारिक रजिस्टरों में लेखा-जोखा दर्ज किया जाए और उसकी गणना पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की जाए, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समिति ने सभी मंदिरों में लगे सीसीटीवी कैमरों को 24 घंटे चालू रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि मंदिर परिसरों में होने वाली गतिविधियों की लगातार निगरानी हो सके। बीकेटीसी द्वारा संचालित विद्यालयों के अधिकारियों को भी प्रशासनिक स्तर पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा निगरानी टीमों को नियमित निरीक्षण करने को कहा गया है। चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में चारधाम यात्रा पड़ावों पर संचालित बीकेटीसी अतिथि गृहों के प्रबंधकों को भी व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच बीकेटीसी ने मंदिर चढ़ावे से संबंधित सभी वित्तीय अभिलेख ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी के माध्यम से गढ़वाल आयुक्त को सौंप दिए हैं। ये अभिलेख राज्य सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएंगे। समिति ने 14 जुलाई से बदरीनाथ में जांच शुरू कर दी है और चढ़ावा गिनती कक्ष की सीसीटीवी फुटेज तथा वित्तीय दस्तावेजों की जांच की है।
दूसरी ओर, पुलिस जांच भी जारी है। सोमवार को जांच टीम ने मंदिर के प्रोटोकॉल कार्यालय और बीकेटीसी के अन्य कार्यालयों के अभिलेखों की जांच की। अधिकारियों ने मंदिर के कुबेर कोष में सुरक्षित रखे गए सोने-चांदी और अन्य कीमती सामान का भी सत्यापन किया। साथ ही दैनिक वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मंदिर प्रशासन द्वारा निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और वित्तीय अभिलेख जांच समिति को सौंपने को पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
