अल्मोड़ा में बाघ के बढ़ते हमलों पर फूटा लोगों का गुस्सा, राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन कर स्थायी समाधान की मांग
अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में बाघ के बढ़ते हमलों को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में दाभरा सौराल क्षेत्र में नवविवाहिता शालू देवी की बाघ के हमले में मौत के बाद बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मोहन तिराहे पर प्रदर्शन किया और मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान लागू करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सरकार और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की तथा राष्ट्रीय राजमार्ग पर सांकेतिक जाम लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले छह महीनों में क्षेत्र में बाघ के हमलों में चार लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन अब तक प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि वन्यजीव हमलों में मृतकों के परिजनों को मिलने वाला मुआवजा पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि आर्थिक सहायता किसी व्यक्ति की जान का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने राज्य सरकार और वन विभाग से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों के लिए ठोस और स्थायी नीति बनाई जाए, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
प्रदर्शनकारियों ने वन क्षेत्र से सटे गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करने और प्रशिक्षित कर्मियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग की। साथ ही, पहाड़ी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन रोकने पर भी जोर दिया गया।
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ग्रामीणों ने शालू देवी को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि लगातार बढ़ रहे बाघ के हमलों से क्षेत्र के लोगों में भय का माहौल है और अब केवल मुआवजा नहीं, बल्कि प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है।
प्रदर्शन में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत, धनगढ़ी पुल संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनील तम्टा, घनानंद शर्मा, बिशन दत्त शर्मा, देव सिंह, देवेंद्र सिंह, आनंद राम, मुनीश कुमार, प्रेम राम, ललित उप्रेती, चंद्र सिंह रावत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
