चमोली में लगातार धधक रहे जंगल, वन्यजीव आबादी की ओर आने से बढ़ी चिंता
कर्णप्रयाग (चमोली)। चमोली जिले के कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली और सिमली क्षेत्रों में जंगलों में आग की घटनाएं लगातार जारी हैं। वनाग्नि से वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं वन्यजीवों के रिहायशी इलाकों की ओर आने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। शुक्रवार शाम सुंदरगांव और ईड़ाबधाणी के जंगलों में आग भड़क उठी, जिससे आसपास के क्षेत्रों में धुएं का गुबार फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि धुएं के कारण आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत, एलर्जी और वायरल संक्रमण की शिकायतें बढ़ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार फरवरी से जारी वनाग्नि ने कर्णप्रयाग नगर से जुड़े जंगलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। शुरुआत में आग सिविल क्षेत्रों में लगी थी, जो बाद में वन विभाग के क्षेत्रों तक फैल गई। इससे आग बुझाने में वन कर्मियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। जंगलों में आग लगने के बाद वन्यजीव सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदरों के झुंड नगर के विभिन्न हिस्सों में पहुंच रहे हैं और दिन के समय बच्चों व बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं।
पिंडर घाटी में नारायणबगड़ इंटर कॉलेज के पीछे और थराली तहसील क्षेत्र के जंगलों में भी आग की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं सिमली की नौली न्याय पंचायत क्षेत्र के सेरागाड़, गुणाड़ और रैगांव गांवों के आसपास जंगल शुक्रवार से जल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार आग से चीड़ के जंगल, चारे के स्रोत और काफल के पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। धुएं से आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोग परेशान हैं।
इसी बीच धनपुर रेंज के जंगलों से अपर बाजार जाने वाले पंचपुलिया मार्ग के पास गुलदार दिखाई देने से लोगों में डर का माहौल है। इस रास्ते का इस्तेमाल सुबह और शाम सैर करने वाले लोग बड़ी संख्या में करते हैं।
वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर ने बताया कि जंगलों में आग लगने के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
