छह साल बाद फिर खुलेगा लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार

छह साल बाद फिर खुलेगा लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार

पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन सीमा व्यापार इस वर्ष छह साल बाद फिर शुरू होने जा रहा है। 17 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित यह व्यापार मार्ग वर्ष 2019 से बंद था। पहले कोरोना महामारी और बाद में सीमा तनाव के कारण व्यापार गतिविधियां ठप हो गई थीं।

केंद्र सरकार से अनुमति मिलने के बाद जिला प्रशासन ने व्यापार दोबारा शुरू कराने की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि सीमा क्षेत्र के व्यापारियों में अभी भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि जून में व्यापार शुरू होने की आधिकारिक तिथि अब तक घोषित नहीं की गई है।

विदेश मंत्रालय से स्वीकृति मिलने के बाद जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगाईं ने विभिन्न विभागों के साथ समीक्षा बैठकें कर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

सीमा व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकली और महासचिव दौलत सिंह रायता ने कहा कि छह साल बाद व्यापार दोबारा शुरू होने से व्यापारी उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में बनी मोटर सड़क से अब परिवहन लागत और यात्रा समय में कमी आएगी। पहले सामान ढोने के लिए घोड़े और खच्चरों पर निर्भर रहना पड़ता था।

सीमा व्यापार व्यवस्था के तहत भारत से कपड़े, मसाले, गुड़ और कृषि उपकरण चीन भेजे जाते हैं, जबकि चीन से जैकेट, तिब्बती जूते, पश्मीना उत्पाद, नमक और चिरबी का आयात किया जाता है। इस वर्ष के लिए संशोधित आयात-निर्यात सूची अभी जारी नहीं हुई है।

इसे भी पढ़ें – ऊधम सिंह नगर में हनी ट्रैप मामला दर्ज, महिला पर अर्द्धसैनिक जवान से 10 लाख मांगने का आरोप

भारत-चीन सीमा व्यापार समिति ने सरकार के सामने कई मांगें भी रखी हैं। इनमें तकलाकोट में भारतीय व्यापारियों के लिए रियायती दुकानें और गोदाम, व्यापार अवधि को 30 नवंबर तक बढ़ाना, सीमा शुल्क और आव्रजन कर्मियों की तैनाती तथा गुंजी में आयातित पशुओं के लिए क्वारंटीन सुविधा स्थापित करना शामिल है।

Saurabh Negi

Share