उत्तराखंड में बदल रहा बर्फबारी का समय, गर्मी से पहले बढ़ रही हिमपात की घटनाएं
उत्तराखंड में बर्फबारी का पैटर्न लगातार बदलता दिखाई दे रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अब पारंपरिक सर्दियों के बजाय प्री-समर सीजन में अधिक बर्फबारी दर्ज की जा रही है। हाल ही में बदरीनाथ धाम से करीब दो किलोमीटर पहले कंचननाला के उद्गम क्षेत्र में हिमस्खलन की घटना के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई है।
हालांकि हिमस्खलन सड़क तक नहीं पहुंचा और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने बताया कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है।
वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान ने बताया कि भारी बर्फबारी के बाद ढलानों पर बर्फ की कई परतें जम जाती हैं। इसी कारण हिमस्खलन की घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं आम हैं और ज्यादातर मामलों में नुकसान नहीं होता।
वैज्ञानिकों ने बताया कि पिछले एक दशक में बर्फबारी के समय में बड़ा बदलाव देखा गया है। पहले दिसंबर और जनवरी में अधिक हिमपात होता था। अब मार्च और अप्रैल जैसे प्री-समर महीनों में ज्यादा बर्फबारी दर्ज की जा रही है।
डॉ. चौहान के अनुसार, इस दौरान तापमान बढ़ने लगता है, जिससे बर्फ कमजोर हो जाती है और तेजी से पिघलती है। इस वर्ष भी यही स्थिति देखने को मिली है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बर्फबारी के बदलते पैटर्न का असर हिमालयी पारिस्थितिकी, ग्लेशियरों और मौसम प्रणाली पर लंबे समय तक पड़ सकता है। यह बदलाव भविष्य में जल स्रोतों और पहाड़ी क्षेत्रों के पर्यावरण के लिए भी चुनौती बन सकता है।
