उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू, नई व्यवस्था हुई शुरू
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने एक जुलाई से मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नए प्राधिकरण का शुभारंभ किया और विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र वितरित किए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अल्पसंख्यक विद्यालयों के विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भी वितरित कीं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि वे भविष्य में मजबूत आधार तैयार कर सकें।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी रही है और राज्य को देश में शिक्षा के मॉडल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत नए प्राधिकरण की स्थापना की गई है।
मुख्यमंत्री ने इस फैसले को लेकर उठ रही आशंकाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी भी समुदाय की पहचान या परंपराओं को प्रभावित करने के लिए नहीं लिया गया है। इसका उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत की शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, तकनीक और कौशल विकास जैसे आधुनिक विषय भी पढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते दौर में राज्य का कोई भी बच्चा आधुनिक शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह प्राधिकरण राज्य के सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर प्रदान करेगा। साथ ही यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास, स्टार्टअप, कौशल विकास और आधुनिक व्यावसायिक प्रशिक्षण को भी बढ़ावा दे रही है ताकि विद्यार्थियों को भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
सरकार के अनुसार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, धार्मिक नेताओं, शिक्षाविदों और समाज के लोगों से नई व्यवस्था को सफल बनाने में सहयोग की अपील की।
यह फैसला राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसका प्रभाव अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई दे सकता है।
