आरटीई लाभ के लिए मदरसों को लेनी होगी अलग मान्यता, सरकार ने जारी किए नियम

आरटीई लाभ के लिए मदरसों को लेनी होगी अलग मान्यता, सरकार ने जारी किए नियम

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्कूल के रूप में संचालित हो रहे मदरसों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत लाभ लेने के लिए अलग से मान्यता प्राप्त करनी होगी। केवल उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण कराने से संस्थान आरटीई योजना के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।

सरकार के अनुसार, जो मदरसे आरटीई के तहत मान्यता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें राज्य के इन्वेस्ट पोर्टल के माध्यम से अलग आवेदन करना होगा। केवल वही संस्थान आरटीई मानकों को पूरा करने के बाद मान्यता प्राप्त कर सकेंगे और योजना का लाभ ले पाएंगे।

अधिकारियों ने बताया कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में पंजीकरण केवल संस्थान को अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के रूप में संचालित करने की अनुमति देता है। आरटीई योजना का लाभ लेने के लिए संस्थानों को अधिनियम के तहत निर्धारित सभी आधारभूत, शैक्षणिक और नियामक मानकों का पालन करना होगा।

आरटीई मान्यता प्राप्त करने वाले मदरसों को निजी विद्यालयों की तरह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होंगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी विद्यालय में 100 सीटें हैं तो उनमें से 25 सीटें आरटीई कोटे के तहत निर्धारित की जाएंगी। इन बच्चों की कक्षा एक से आठ तक की फीस राज्य सरकार वहन करेगी।

शिक्षा विभाग के अनुसार मान्यता प्राप्त संस्थानों को समग्र शिक्षा पोर्टल पर सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके बाद पात्र अभिभावक अपने बच्चों के प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे और लॉटरी प्रणाली के माध्यम से विद्यालयों का आवंटन किया जाएगा।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक केएस रावत ने कहा कि मदरसा स्कूलों को भी निजी विद्यालयों की तरह उत्तराखंड इन्वेस्ट पोर्टल के माध्यम से आरटीई मान्यता के लिए आवेदन करना होगा। औपचारिक मंजूरी मिलने के बाद ही आरटीई सीट आवंटन प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यह व्यवस्था राज्य में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। हालांकि नए नियमों के बाद कई मदरसों को आधारभूत सुविधाओं और मानकों को लेकर अतिरिक्त तैयारी करनी पड़ सकती है।

Saurabh Negi

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