उत्तराखंड में 8 जून से शुरू होगा वोटर सत्यापन अभियान, घर पर नहीं मिलने पर परिजन भर सकेंगे फॉर्म
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम 8 जून से शुरू होगा। चुनाव विभाग ने मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। अब यदि सत्यापन के दौरान मतदाता घर पर मौजूद नहीं मिलता है, तो परिवार का कोई सदस्य उसकी ओर से फॉर्म भरकर जमा कर सकेगा।
हालांकि, फॉर्म जमा करने वाले व्यक्ति को मतदाता से अपना संबंध बताना होगा। राज्य निर्वाचन कार्यालय ने अभियान को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
अभियान के दौरान मतदाताओं को फॉर्म उपलब्ध कराए जाएंगे। इन्हें मतदाता स्वयं या बीएलओ की मदद से भर सकेंगे। फॉर्म में प्री-एसआईआर मैपिंग के दौरान जुटाई गई जानकारी दर्ज करनी होगी।
मतदाताओं को जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। आधार संख्या उपलब्ध होने पर उसे भी दर्ज किया जा सकेगा, हालांकि यह अनिवार्य नहीं होगी। इसके अलावा मोबाइल नंबर, माता-पिता की जानकारी और पति या पत्नी के वोटर आईडी नंबर भी देने होंगे।
मतदाता को हाल की एक फोटो भी देनी होगी। यदि फोटो उपलब्ध नहीं है तो बीएलओ मोबाइल फोन से नई तस्वीर खींच सकेंगे।
चुनाव विभाग ने बंद घरों के लिए भी प्रक्रिया तय की है। बीएलओ ऐसे घरों पर तीन बार जाएंगे। पहली बार घर बंद मिलने पर फॉर्म परिसर में या दरवाजे के नीचे छोड़ा जाएगा। साथ ही अगली विजिट की तारीख और बीएलओ का मोबाइल नंबर लिखी पर्ची चिपकाई जाएगी।
दूसरी बार भी घर बंद मिलने पर तीसरी विजिट की सूचना छोड़ी जाएगी। तीसरी बार भी मतदाता नहीं मिलने पर उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
सभी भरे हुए फॉर्म बीएलओ मोबाइल एप के जरिए अपलोड किए जाएंगे। एक प्रति मतदाता को दी जाएगी, जबकि दूसरी बीएलओ अपने रिकॉर्ड में रखेंगे। अपलोड की गई जानकारी का डिजिटल सत्यापन भी होगा।
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यदि किसी जानकारी में गड़बड़ी मिलती है तो मतदाता को नोटिस भेजा जाएगा। जवाब मिलने के बाद ही नाम मतदाता सूची में रखने या हटाने का फैसला लिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी बी वी आर सी पुरुषोत्तम ने सभी मतदाताओं से बीएलओ के साथ सहयोग करने की अपील की है। यह अभियान मतदाता सूची को अधिक सटीक और अपडेट करने के लिए अहम माना जा रहा है।
