मई के आखिरी दिन बागेश्वर की चोटियों पर बर्फबारी, मौसम के बदले मिजाज ने बढ़ाई चिंता

मई के आखिरी दिन बागेश्वर की चोटियों पर बर्फबारी, मौसम के बदले मिजाज ने बढ़ाई चिंता

बागेश्वर जिले की कपकोट तहसील के सोराग क्षेत्र की ऊंची चोटियों पर मई के आखिरी दिन हुई बर्फबारी ने स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। जून शुरू होने से ठीक पहले पहाड़ों पर ताजा बर्फ की चादर बिछने से क्षेत्र में एक बार फिर सर्दियों जैसा माहौल बन गया।

आमतौर पर इस समय ऊंचाई वाले बुग्यालों में पशुपालक अपने मवेशियों के साथ पहुंच जाते हैं। लेकिन अचानक बदले मौसम ने वहां की परिस्थितियां बदल दी हैं। बर्फबारी के बाद हिमालयी गांवों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। ठंड बढ़ने पर लोगों को फिर से गर्म कपड़े निकालने पड़े और कई परिवारों ने आग जलाकर ठंड से बचाव किया।

इस मौसम परिवर्तन का असर पशुपालकों पर भी पड़ा है। ऊंचाई वाले बुग्यालों की ओर गए भेड़-बकरी पालक अब वापस निचले इलाकों की ओर लौटने लगे हैं। बर्फबारी और बढ़ी ठंड के कारण पशुओं के लिए चराई की स्थिति प्रभावित हुई है।

स्थानीय निवासी दीवान सिंह दानू ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार मई के अंत और जून की शुरुआत में बर्फबारी देखी है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में इस समय पशु चरते हैं, वहां बर्फ जमना सामान्य बात नहीं है।

घटना के बाद हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पिछले कुछ वर्षों में असमय बारिश, ओलावृष्टि और गर्म महीनों में बर्फबारी जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

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पर्यावरणविद किशन सिंह मालड़ा ने कहा कि इस बर्फबारी का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि यह केवल एक मौसमी घटना है या हिमालयी जलवायु चक्र में बड़े बदलाव का संकेत। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बदलाव कृषि, पशुपालन, जल स्रोतों और संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं।

 

Saurabh Negi

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