देहरादून में सचिवालय कूच के दौरान प्रधानों ने तोड़े बैरिकेड, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन
उत्तराखंड प्रदेश प्रधान संगठन के सदस्यों ने गुरुवार को अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर देहरादून में सचिवालय कूच किया। परेड ग्राउंड से शुरू हुआ मार्च सुभाष रोड पर पुलिस के बैरिकेड के कारण टकराव में बदल गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और बैरिकेड तोड़ दिए गए।
पुलिस ने सचिवालय से पहले प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। इससे प्रदर्शनकारी नाराज हो गए और पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई। बाद में कई प्रदर्शनकारी बैरिकेड पर चढ़कर आगे बढ़ गए और सचिवालय की ओर कूच जारी रखा।
संगठन के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश महरा ने कहा कि सरकार पंचायत प्रतिनिधियों के साथ अन्य वर्गों की तुलना में भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों के सामने वित्तीय और प्रशासनिक स्तर पर कई समस्याएं हैं।
प्रदर्शनकारियों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों के मानदेय को महंगाई के मुकाबले कम बताया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में आ रही दिक्कतों को भी उठाया।
संगठन ने ग्राम प्रधानों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की। इसके अलावा जिला योजना समिति की बैठकों में ग्राम प्रधानों को प्रतिनिधित्व देने और अलग प्रधान निधि बनाने की मांग भी रखी गई।
प्रधान संगठन ने 10 लाख रुपये तक की लागत वाले कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था घोषित करने की मांग की। इसके साथ ही पंचायती राज विभाग के 29 विषय पंचायतों को हस्तांतरित करने की मांग भी उठाई गई।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनकी मांगों का उद्देश्य स्थानीय निकायों को वित्तीय और प्रशासनिक रूप से मजबूत करना है। संगठन ने तीन स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पंचायतों को अधिकार और पर्याप्त संसाधन देने की मांग की।

