उत्तराखंड में 15 हजार शिक्षकों को मिल सकती है राहत, सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी कराने की तैयारी
देहरादून – उत्तराखंड में करीब 15 हजार सेवारत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा से राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सेवारत शिक्षकों के लिए अलग शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने पर विचार कर रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को उत्तर प्रदेश में लागू व्यवस्था का अध्ययन कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में शिक्षा मंत्री के सामने यह मामला उठाया था। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव विनोद धौंडियाल और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत को उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का अध्ययन करने और उत्तराखंड के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ की प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य दिगंबर सिंह नेगी के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं जिनकी नियुक्ति शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने से पहले हुई थी। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय वे तत्कालीन सेवा नियमों के अनुसार निर्धारित सभी योग्यताएं पूरी करते थे।
शिक्षकों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने 23 अगस्त 2010 को कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य की थी। इससे पहले नियुक्त हुए शिक्षकों का कहना है कि उन पर बाद में लागू हुई पात्रता शर्त को उसी रूप में लागू करना उचित नहीं है।
53-54 वर्ष की उम्र में परीक्षा को लेकर चिंता
सेवारत शिक्षकों का कहना है कि उनमें से कई की उम्र अब 53 से 54 वर्ष के बीच है। इस उम्र में दोबारा पात्रता परीक्षा की तैयारी और उसे पास करने को लेकर शिक्षक चिंतित हैं।
शिक्षकों ने सरकार से या तो उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा से छूट देने या सेवारत शिक्षकों के लिए अलग परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि पात्रता परीक्षा से जुड़ी शर्तों का असर पदोन्नति सहित उनकी सेवा संबंधी मामलों पर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश की व्यवस्था का होगा अध्ययन
शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश में सेवारत शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा को उत्तराखंड के लिए संभावित मॉडल के रूप में सामने रखा है। शिक्षकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश से प्रभावित सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने का निर्णय लिया है।
बताया गया है कि उत्तर प्रदेश की व्यवस्था में प्राथमिक स्तर के 64,062 और उच्च प्राथमिक स्तर के 76,256 शिक्षकों को शामिल किया गया है।
उत्तराखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है या नहीं, इसका अध्ययन शिक्षा विभाग के अधिकारी करेंगे। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव विनोद धौंडियाल ने बताया कि शिक्षा मंत्री के निर्देश पर अलग शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। सरकार की अनुमति और आदेश के बाद ही परीक्षा आयोजित की जा सकेगी।
इस मामले को लेकर शिक्षकों और अधिकारियों के बीच 17 और 18 अगस्त को बैठक प्रस्तावित है। बैठक में व्यवस्था और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा की जाएगी।
