उत्तराखंड में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए बनेगी एकीकृत नीति, सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर

उत्तराखंड में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण के लिए बनेगी एकीकृत नीति, सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर

उत्तराखंड सरकार राज्य में ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एकीकृत ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण नीति लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नीति का उद्देश्य विभिन्न विभागों के नियमों को एक साझा ढांचे में लाकर समन्वय और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।

हाल के वर्षों में बदलते मौसम, प्राकृतिक आपदाओं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बढ़ती दुर्घटनाओं ने ऐसी नीति की आवश्यकता को और बढ़ाया है। उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल क्षेत्र समेत कई घटनाओं के बाद सुरक्षा मानकों को सख्त करने पर जोर दिया गया है।

वन विभाग ने नीति का मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दिया है। पर्यटन विभाग के साथ विचार-विमर्श के बाद अंतिम प्रस्ताव को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।

प्रस्तावित नीति में ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों के पंजीकरण तथा सत्यापन को अनिवार्य बनाने का प्रावधान है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में सूचना देने की प्रक्रिया भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की जाएगी, ताकि राहत और बचाव कार्यों में देरी न हो।

नीति में टूर ऑपरेटरों, गाइडों, पोर्टरों और ट्रेकर्स की जिम्मेदारियां भी तय की जाएंगी। गाइड और पोर्टरों की जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है, ताकि वे केवल मार्गदर्शक ही नहीं बल्कि सुरक्षा सहयोगी की भूमिका भी निभाएं।

ट्रेकिंग और पर्वतारोहण गतिविधियों को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का भी प्रस्ताव है। इसके माध्यम से पंजीकरण, सत्यापन और आवश्यक सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।

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वन विभाग के प्रमुख सचिव रमेश कुमार सुधांशु ने बताया कि मसौदा नीति की व्यावहारिक समीक्षा की जा रही है। पर्यटन विभाग के साथ चर्चा पूरी होने के बाद इसे मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद राज्य में नई व्यवस्था लागू की जाएगी।

Saurabh Negi

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