4जी सैचुरेशन योजना के बावजूद नेटवर्क से वंचित कई गांव, मोबाइल सिग्नल के लिए छतों पर चढ़ने को मजबूर ग्रामीण

4जी सैचुरेशन योजना के बावजूद नेटवर्क से वंचित कई गांव, मोबाइल सिग्नल के लिए छतों पर चढ़ने को मजबूर ग्रामीण

केंद्र सरकार की बीएसएनएल 4जी सैचुरेशन योजना शुरू होने के वर्षों बाद भी उत्तराखंड के गाड़ क्षेत्र के कई गांव मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी के दावे अभी तक उनके गांवों तक नहीं पहुंच पाए हैं।

हलजौरा, बेलकी, इनायतपुर, इब्राहिमपुर मसाई कला, गोकुलवाला, डांडा, बनवाला, शाहमंसूर और दाउदबासी समेत कई गांवों में आज भी मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या बनी हुई है। कुछ स्थानों पर लोगों को फोन करने के लिए घरों की छतों पर चढ़कर कमजोर सिग्नल तलाशने पड़ते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन, उपजिलाधिकारी और दूरसंचार विभाग को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। नेटवर्क की कमी का असर शिक्षा, संचार, डिजिटल बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक पहुंच पर पड़ रहा है।

बीएसएनएल 4जी सैचुरेशन योजना का उद्देश्य दूरदराज और नेटवर्कविहीन क्षेत्रों को मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं से जोड़ना था। इसके तहत देशभर में नए टावर लगाने और पुराने टावरों को 4जी तकनीक से अपग्रेड करने का कार्य किया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उनके क्षेत्र को इसका लाभ नहीं मिला।

हलजौरा ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम ने बताया कि क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाने की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों को पत्र भेजे गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को कठिनाई होती है। दुर्घटना या बीमारी के समय डॉक्टरों और परिजनों से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है। छात्र ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल संसाधनों का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, जबकि डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

किसानों को मौसम, फसल बीमा, कृषि योजनाओं और मंडी भाव की जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। वहीं आधार, राशन कार्ड, पेंशन और आयुष्मान कार्ड जैसी ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच भी बाधित हो रही है।

कनिष्ठ दूरसंचार अधिकारी कंचन कांत ने बताया कि एक मोबाइल टावर स्थापित करने में करीब 20 लाख रुपये की लागत आती है। उन्होंने कहा कि मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है और इन गांवों को सैचुरेशन योजना के तहत जोड़ने का प्रस्ताव भेजा गया है, हालांकि अभी कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।

Saurabh Negi

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